रैंसमवेयर वायरस पर आरबीआई का अलर्ट
आरबीआई ने रैंसमवेयर वायरस पर बैंकों को सावधानी बरतने की अपील की है
रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने वायरस अटैक पर बैंकों को चेतावनी जारी की है. आरबीआई ने बैंकों को अलर्ट करते हुए कहा है कि रैंसमवेयर वायरस का अटैक एटीम पर हो सकता है. इसलिए बैंकों को सचेत रहना चाहिए.
आरबीआई ने रैंसमवेयर वायरस पर बैंकों को सावधानी बरतने की अपील की है. रैंसमवेयर वायरस अटैक अब तक का सबसे बड़ा वायरस हमला है. अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) से चोरी किए गए ‘साइबर हथियारों’ का इस्तेमाल कर भारत समेत लगभग 100 देशों पर बड़े पैमाने पर साइबर हमले किए गए.
अमेरिका के मीडिया संस्थानों ने कहा कि सबसे पहले स्वीडन, ब्रिटेन और फ्रांस से साइबर हमले की खबर मिली. सुरक्षा सॉफ्टवेयर कंपनी ‘अवास्ट’ के अनुसार इस गतिविधि में शुक्रवार को बढ़ोतरी देखी गई थी.
एक कंप्यूटर मालवेयर के जरिए हमला करने वालों ने लोगों के कंप्यूटर सिस्टम को लॉक कर दिया और उसके बाद उसे खोलने के लिए फिरौती की मांग की. साइबर अटैकर्स ने बिटकॉइन्स में 300 डॉलर की फिरौती की मांग की. फ्रांस, रूस, ब्रिटेन, स्वीडन, रूस सहित दुनिया के कई देश इससे प्रभावित हुए.क्या होता है रैनसमवेयर साइबर अटैक
आमतौर पर कई मालवेयर, जिन्हें हम अक्सर वायरस कहते हैं, आपके कंप्यूटर में गलत तरीके से घुस जाते हैं. अक्सर इनका उद्देश्य या तो आपके कंप्यूटर के डाटा को चुराना होता है या फिर उसे मिटाना. लेकिन रैनसमवेयर आपके सिस्टम में आकर आपके डाटा को 'इनक्रिप्ट' यानी लॉक कर देता है. यूजर तब तक इसमें मौजूद डेटा तक नहीं पहुंच पाता जब तक कि वह इसे ‘अनलॉक' करने के लिए रैनसम यानी फिरौती नहीं देता. ये मालवेयर ईमेल के जरिए फैलता है.
इस तरह के साइबर अटैक से आप अपने पीसी/लैपटॉप में सेव फाइलों, तस्वीरों और अन्य दस्तावेजों से हाथ धो सकते हैं। ऐसे में आपको ये कदम जल्द से जल्द उठाने चाहिए-
तुरंत लें अपनी फाइलों का बैकअप
बिना देर किए अपनी सभी फाइलों का एक अलग सिस्टम में बैकअप ले लें। इसके लिए सबसे बेहतर एक एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव रहेगी जो इंटरनेट से जुड़ी न हो। ऐसे में अगर आप साइबर अटैक का शिकार होते भी हैं, तब भी आपकी सारी इन्फर्मेशन आपके पास सुरक्षित रहेगी और हैकर्स फिरौती वसूलने के लिए उसका फायदा नहीं उठा पाएंगे।
संदिग्ध ईमेल्स, वेबसाइट्स और ऐप्स से सावधान
रैंसमवेयर के कम करने के लिए यह जरूरी होता है कि हैकर्स के शिकार बनाए जाने वाले सिस्टम में उस खतरनाक सॉफ्टवेयर को डाउननोड करें। इसी के जरिए बाद में अटैक किया जाता है। फर्जी ईमेल्स, वेबसाइट्स पर दिखने वाले संदिग्ध एड्स और अनवेरिफाइड ऐप्स का इस्तेमाल करके ही इन सॉफ्टवेयर्स को सिस्टम में इंस्टॉल किया जाता है। ऐसे में हमेशा सावधान रहें और गैरजरूरी ईमेल्स और वेबसाइट्स को खोलने से बचें। ऐसे ऐप को कभी इंस्टॉल न करें जिन्हें ऑफिशल स्टोर द्वारा वेरिफाई न किया गया हो। साथ ही कोई भी प्रोग्राम इंस्टॉल करने के पहले उसका रिव्यू जरूर पढ़ें।
एंटीवाइरस का इस्तेमाल करें
तुरंत लें अपनी फाइलों का बैकअप
बिना देर किए अपनी सभी फाइलों का एक अलग सिस्टम में बैकअप ले लें। इसके लिए सबसे बेहतर एक एक्सटर्नल हार्ड ड्राइव रहेगी जो इंटरनेट से जुड़ी न हो। ऐसे में अगर आप साइबर अटैक का शिकार होते भी हैं, तब भी आपकी सारी इन्फर्मेशन आपके पास सुरक्षित रहेगी और हैकर्स फिरौती वसूलने के लिए उसका फायदा नहीं उठा पाएंगे।
संदिग्ध ईमेल्स, वेबसाइट्स और ऐप्स से सावधान
रैंसमवेयर के कम करने के लिए यह जरूरी होता है कि हैकर्स के शिकार बनाए जाने वाले सिस्टम में उस खतरनाक सॉफ्टवेयर को डाउननोड करें। इसी के जरिए बाद में अटैक किया जाता है। फर्जी ईमेल्स, वेबसाइट्स पर दिखने वाले संदिग्ध एड्स और अनवेरिफाइड ऐप्स का इस्तेमाल करके ही इन सॉफ्टवेयर्स को सिस्टम में इंस्टॉल किया जाता है। ऐसे में हमेशा सावधान रहें और गैरजरूरी ईमेल्स और वेबसाइट्स को खोलने से बचें। ऐसे ऐप को कभी इंस्टॉल न करें जिन्हें ऑफिशल स्टोर द्वारा वेरिफाई न किया गया हो। साथ ही कोई भी प्रोग्राम इंस्टॉल करने के पहले उसका रिव्यू जरूर पढ़ें।
एंटीवाइरस का इस्तेमाल करें

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